Panga review: सपनों का उम्र से क्या वास्ता, परिवार साथ हो तो मुमकिन है हर रास्ता

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Movie Review: पंगा 

कलाकार: कंगना रनौत, जस्सी गिल, ऋचा चड्ढा नीना गुप्ता और यज्ञ भसीन  

निर्देशक: अश्विनी अय्यर तिवारी 

निर्माता- फॉक्स स्टार स्टूडियो 

मून- 3. 5  मून्स 

परिचय 

निर्देशिका अश्विनी अय्यर तिवारी 'बरेली की बर्फी' (2017) की बाद 'पंगा' लेकर आई हैं. कंगना रनौत के साथ यह उनकी पहली फिल्म है. आमतौर 'पंगा' शब्द सुनते हमारे दिमाग में लड़ाई- झगड़े का दृश्य आता है लेकिन अश्विनी ने इसे अलग रूप में दर्शकों के सामने लाने की कोशिश की है, जिसमें वह काफी हद तक कामयाब हुई है. 

फिल्म की कहानी एक ऐसी महिला की है जो भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी प्लेयर के रूप में खेलना चाहती हैं लेकिन परिवार और बच्चें की परवरिश में वह अपने सपनों के पंखों को काट देती है. 

कहानी 

भारत के लिए एशियन गेम्स कबड्डी 2018 चैम्पियनशिप में खेलना जया निगम (कंगना रनौत) का सपना होता है लेकिन प्रशांत (जस्सी गिल) से शादी के बाद और बेटे आदी के जन्म के बाद वह इस सपने को भूल जाती है. पति प्रशांत और बेटे आदी की जिम्मेदारियों और घर संभालने में वह इतनी रम जाती है कि खुद के बारे में सोचना भूल जाती है. 

जया रेलवे टिकट विभाग में कार्यरत होती है. ऑफिस पहुंचने पर वह रेलवे स्टेशन पर बैठी ट्रैन का इंतजार कर रही होती है तभी उनकी नजर कुछ कबड्डी प्लेयर्स पर पड़ती है जो प्लेटफॉर्म पर बैठकर ट्रैन का इंतजार कर रही होती है. जया उनके पास जाती है, उन्हें लगता है कि वह लड़कियां शायद उन्हें पहचान लेंगी लेकिन वह पहचान नहीं पाती. नेशनल लेवल पर कबड्डी प्लेयर रह चुकी जया को जब वह लड़कियां पहचान नहीं पाती, वह अंदर से टूट जाती है. ऋचा चड्ढा (मीनू) जो फिल्म में जया की दोस्त का किरदार निभा रही है, कबड्डी प्लेयर्स के सिलेक्शन के लिए भोपाल आती है. जया ने भले कबड्डी खेलना छोड़ दिया हो लेकिन जज्बा तो उनमें अब भी है यह बात मीनू को पता होती है. 

सरकारी नौकरी होने के बावजूद एक घंटा देर से आने पर जया को बॉस की डांट सुननी पड़ती है. इसी बीच बेटे के स्कूल में फैंसी ड्रेस कॉम्पिटिशन होता है. आदी मां से समय पर स्कूल आने के लिए कहता है लेकिन काम के चक्कर में वह समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाती और वह जया से नाराज हो जाता है. जया को इस बात का मलाल होता है कि वह पति और बेटे बारे में सोचे लेकिन उसके बारे में कोई नहीं सोचता कि वह क्या चाहती है. 

जस्सी गिल जो फिल्म में कंगना के पति का किरदार निभा रहे है, बेटे को समझाते है उसकी मां ने उन दोनों के लिए क्या कुछ किया है और यहीं से शुरू होती है फिल्म की फ्लैशबैक स्टोरी. नेशनल लेवल प्लेयर रह चुकीं जया को बेटे आदी और पति प्रशांत कबड्डी में 'कमबैक' करने के लिए कहते है लेकिन क्या यह इतना आसान है. अक्सर लोगों को लगता है कि महिला की शादी और बच्चा होने के बाद वह सपनों की दुनिया में कमबैक नहीं कर सकती लेकिन यह फिल्म ऐसी सोच रखने वाले सभी लोगों के मुंह पर तमाचा है. 

फर्स्ट हाल्फ में आप एक सेकंड के लिए ऊबेंगे नहीं. फिल्म का हर दृश्य और हर डायलॉग आपको कुर्सी से बांधे रखेगा. सेकंड हाल्फ में जया के सपनों का सफर शुरू होता है, जिसे वो पाना चाहती है. अब जया एशियन गेम्स कबड्डी 2018 चैम्पियनशिप में सिलेक्ट होती है या नहीं भारत को वह जीत दिला पाती है या नहीं इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी. 

फिल्म के बारे में 

फिल्म की ख़ास बात यह है कि छोटी- छोटी बारीकियों को बखूबी दिखाया गया है. शादीशुदा महिला के लिए पति और बच्चों को छोड़कर अपने सपनों को पूरा करने के लिए दुसरे शहर जाना आसान नहीं होता. इसके पीछे पति और बच्चों की दशा होती है यह सारी चीजें फिल्म मजबूत कड़ी है. पडोसी को बच्चों की जिम्मेदारी सौंपना, समय- समाय पर उनका हाल पूछना ये सारी बातें हर महिला खुद से जोड़ पाएगी.  

फिल्म की कास्ट 

कास्टिंग की बात करें तो फिल्म में जबरदस्त कास्टिंग की गई है. हर किरदार अपने अभिनय से आपको बांधे रखेगा. जया के पति के रूप में जस्सी गिल ने कमाल की एक्टिंग की है. गायक उनके बाद भी उनका अभिनय देख आपको नहीं लगेगा कि ओवर एक्टिंग कर रहे हैं या किरदार में ढल नहीं पा रहे हैं. कंगना की एक्टिंग की तो जीतनी तारीफ़ करें वह कम है. सब जानते हैं कि वह किरदार में ढल जाती है. ऋचा चड्ढा जिन्होंने कंगना की दोस्त का किरदार निभाया है, मंझी हुई अदाकारा है. अपने डायलॉग से उन्होंने ऑडियंस को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया है और फिल्म का सबसे छोटा किरदार यज्ञ भसीन. फिल्म में यज्ञ भसीन छोटा पैकेट बड़ा धमाका है. उनका अभिनय देख बड़े- बड़े शर्मा जाए. 

सिनेमेटोग्राफी 

फिल्म में अर्चित पटेल और जय पटेल ने डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी की कमान संभाली है, जो कि काबिल- ए- तारीफ़ है. अंकित बल्हारा, संचित बल्हारा और शंकर एहसान लोय ने संगीत दिया है. फिल्म के गाने सुन आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे और झूमने पर मजबूर कर देंगे. वहीं,डायरेक्टर अश्विनी के पति नितेश तिवारी के अडिशनल डायलॉग और स्क्रीनप्ले लिखा है.

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