Panipat Movie Review: मराठों की वीरता को सलाम करती है अर्जुन कपूर, कृति सेनन और संजय दत्त की यह फिल्म

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फिल्म: पानीपत 

कास्ट: अर्जुन कपूर, कृति सेनन, संजय दत्त

डायरेक्टर: आशुतोष गोवारिकर 

रेटिंग्स: 4 मून्स

आशुतोष गोवारीकर अब एक बार फिर पीरियड ड्रामा लेकर आए हैं और इस बार कहानी है 'पानीपत' की. उनकी यह बहुप्रतीक्षित फिल्म लार्जर दें लाइफ और सभी अपेक्षाओं से परे है. अर्जुन कपूर, कृति सेनन और संजय दत्त की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म पानीपत की तीसरी लड़ाई पर आधारित है, जो 1761 में मराठों और अफगान आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली के बीच लड़ी गई थी. यह ऐतिहासिक कहानी, जो ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है, को आशुतोष ने बहुत ही रचनात्मक तरीके से पेश किया है. यह फिल्म मराठों की वीरता को सलाम करती है और दर्शकों को कभी न भूलने वाली यात्रा पर ले जाती है. 

18 वीं शताब्दी के भारत में मराठा सेना के कमांडर-इन-चीफ सदाशिव राव भाऊ अफगानिस्तान के राजा अहमद शाह अब्दाली के खिलाफ पानीपत की तीसरी लड़ाई में अपने बल का नेतृत्व करते हैं. फिल्म पानीपत को आप उस अवधि की जटिल राजनीति, युद्ध रणनीतियों और जटिल कार्यप्रणाली के गठबंधन की कहानी को किसी किताब के पन्ने की तरह पलटता हुआ देखेंगे. सदाशिव राव भाऊ (अर्जुन कपूर) अपने चचेरे भाई नानासाहेब पेशवा (मोहनीश बहल) की सेना में एक सक्षम कमांडर हैं. उदगीर के निज़ाम के खिलाफ एक विजयी लड़ाई के बाद, सदाशिव भाऊ को मराठा पेशवा ने उनकी पत्नी पार्वती बाई (कृति सनोन) के सहयोग से दिल्ली में अपनी सेना का नेतृत्व करने के लिए चुना होता है. अफगानिस्तान के राजा, अहमद शाह अब्दाली (संजय दत्त) ने मराठों को हराने के इरादे से नजीब-उद-दौला (मंत्रा) के साथ गठबंधन करने के बाद भारत में अपना अखाड़ा स्थापित किया और अपनी विस्तार शक्ति पर अंकुश लगाया. फिल्म में मोहनीश बहल, पद्मिनी कोल्हापुरी, नवाब शाह, मंत्रा और जीनत अमान जैसे अन्य कलाकार भी एक विशाल सहायक कलाकार के रूप में है.

सदाशिव भाऊ की ताकत, वीरता और जांबाज़ी प्रेरणादायक है. पार्वती बाई इस महाकाव्य लड़ाई में एक अर्धांगिनी के रूप में काफी शक्तिशाली हैं. दूसरी ओर, अहमद शाह अब्दाली भयंकर, खतरनाक और काफी डरावना है. फिल्म में मराठा साम्राज्य की सच्ची भावना को दिखाया गया है जिसने 100 वर्षों से भारत की रक्षा की. यह लड़ाई की पृष्ठभूमि के साथ साथ पार्वती बाई के साथ सदाशिव भाऊ की हृदयस्पर्शी प्रेम कहानी भी प्रस्तुत करती है जिसने इतिहास को बदल दिया.

फिल्म पानीपत का इंटरवल से पहले का हिस्सा काफी आकर्षक है. प्रदर्शन, निष्पादन, एक एक इन सबकुछ बेहतरीन है. फिल्म का पहला हाफ लगभग डेढ़ घंटे होने के बावजूद तेजी से भागता हुआ दिखाई दिया. लेकिन, दूसरा हाफ उससे भी ज्यादा इंट्रेस्टिंग रहा. 2 घंटे 51 मिनट लम्बी 'पानीपत' हमें पूरी तरह से फिल्म से बांध कर रखती है.

सदाशिव के रूप में अर्जुन ने बहुत अच्छा काम किया है और अपनी भूमिका के साथ पूरी तरह इन्साफ किया है. फिल्म में कृति सरप्राइज पैकेज है. फिल्म, जो कृति की आवाज से शुरू होती है, उनके साथ ही समाप्त भी होती है. 'शानदार', कृति के प्रदर्शन के लिए सही शब्द है. कृति वास्तव में अपने आत्मविश्वास और स्क्रीन अपीयरेंस के साथ फिल्म में छाई रही. वास्तव में, उनकी प्रेम कहानी विकसित होने के साथ अर्जुन के साथ उनकी केमिस्ट्री भी काफी अच्छी होती हुई दिखाई दी. संजय इस फिल्म के मुख्य किरदार हैं. संजय प्रत्येक दृश्य के बॉस थे. वह इस फिल्म का, पानीपत की कहानी का बहुत बड़ा हिस्सा हैं. सहायक कलाकार - मोहनीश बहल, पद्मिनी कोहलापुरी, जीनत अमान (विशेष उपस्थिति) फिल्म की जीवंतता को जोड़े रखते हैं और इसे देखने लायक बनाते हैं.

फिल्म को एक भव्य पैमाने पर बनाया गया है औरइनकी मेहनत लगभग हर दृश्य में नजर आती है. नीता लुल्ला से अच्छा शायद ही कोई इस फिल्म के ड्रेस डिजाइन को बना सकता था. सेट और डिजाइन शानदार हैं. संगीतकार अजय -अतुल के गाने मूड को और अच्छा बनाते हैं और इन्हे काफी अच्छी तरह से कोरियोग्राफ भी किया गया है. अंतिम युद्ध वाले सीन में आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. हमेशा की तरह, आशुतोष गोवारिकर ने एक सराहनीय काम किया है. सिनेमैटोग्राफी, साउंड डिज़ाइन और विज़ुअल इफेक्ट्स भी इस अवधि के ड्रामा को सही से दिखा पाने में सक्षम हुए हैं. यह एक ऐसी फिल्म है जिसे देखने के बाद हर कोई 'हर हर महादेव' कहकर थिएटर से निकलेगा.

पीपिंगमून 'पानीपत' को 4 मून्स देता है!

 

(Source: PeepingMoon)

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